अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस 2019: वो 7 बातें जिसे सुनकर हर आदमी परेशान हो जाता है

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस के अवसर पर, हम कुछ ऐसे सामान्य रूढ़िवादों पर नज़र डालते हैं, जो हर आदमी / लड़का चाहता है कि इसे दुनिया से निकाल- बाहर कर दे।

Shabir Ahluwalia aka Abhi on KKB sets

“किसी लड़की की तरह मत रोओ,” “एक महिला की तरह मत लड़ो,” इस तरह की बातें कह कर आदमी को दुःख पहुँचाया जा सकता है, ऐसे कुछ मापदंड समाज में प्रचलित हैं जिसका हम विरोध करते है। पुरुष स्त्री से शारीरिक तौर पर मजबूत है। उसे एक रक्षक की भूमिका निभाने, संघर्ष करने और परिवार का भरण पोषण करनेवाला के रूप में देखा जाता है। लेकिन सिर्फ पुरुष ही क्यों? कर्तबगारी दिखाने में महिलाएं और पुरुष समान है। अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस के अवसर पर, यहां वे सात बातें हैं जिन्हें सुनकर पुरुष परेशान हो जाते हैं:

सभी पुरुष एक जैसे होते हैं

‘सभी पुरुष एक जैसे होते हैं,’ मेरी सबसे अच्छी दोस्त उसके दिल तोड़ने वाले हादसे के बाद, अपना बयान देने के लिए काफ़ी जल्दी में थी। पुरुष सब एक जैसे नहीं होते! हम सभी से नहीं मिल सकते और सभी से बात भी नहीं कर सकते, बिलकूल नही। फिर हम सभी को एक तराजू में कैसे माप सकते हैं?

ये मर्दों का काम नहीं है

ये मर्दों का काम नहीं है यह वाक्य रसोई से संबंधित हैं। महिलाओं को घर और बच्चों की देखभाल करनी चाहिए यह लंबे समय से चले आ रहे अतीत की धारणाएं हैं। आज के समय में, पुरुष और महिला दोनों ही खाना बना सकते हैं, बच्चों की परवरिश कर सकते हैं और एक घर संभाल सकते हैं।

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क्या लड़की की तरह रो रहा है?

भावनाएं किसी पुरुष या महिला को कम मजबूत साबित नहीं करती। हां, पुरुष भी रोते हैं। आप उन्हें हमेशा कठोरता की अपेक्षा से मत देखिए। वे भी रो सकते हैं, और उन्हें रोना भी चाहिए। आख़िर इंसान ही तो है।

पुरुष हमेशा मम्मा के लड़के नहीं होते हैं

भारतीय समाज में यह पूर्व धारणा है। यदि यह एक लड़का है, तो उसे अपनी मां के करीब होना चाहिए। जबकि ‘मम्मा का लड़का’ होने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन सभी ऐसे नहीं होते हैं। कोई कोई ‘डैडी बॉय’ भी होते हैं। आखिरकार, यह आपके परिवार को प्यार करने के बारे में है!

मर्द खाना नहीं बनाते

कहते हैं कि इंसान के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर गुजरता है। दुनिया में कुछ बेहतरीन शेफ पुरुष हैं। तो अब आप बताएं पाक कौशल केवल महिलाओं के लिए अपवाद क्यों हैं?

क्या लड़की की तरह शर्मा रहे हो?

पुरुषों और महिलाओं, दोनों को तारीफ पसंद है, तथा दोनों की क़ाबिलियत एकसमान है; फ़िर यह बात,’क्या लड़की की तरह शर्मा रहे हो? को अनदेखा कर देना चाहिए। पुरुष भी शरमाते हैं।

लंबा काला और सुंदर…

हां, पुरुषों को भी शरीर शर्मसार हो जाता है। हाँ, वे यौन उत्पीड़न का भी अनुभव करते हैं। एक पेरफ़ेक्ट पुरुष की धारणा को उसी के रूप में परिभाषित किया जाता है जो ‘लंबा, गहरा और सुंदर है।’ लक्षित विज्ञापन ने न केवल लड़कियों बल्कि लड़कों के लिए भी झूठे सौंदर्य मानक तय किए हैं।

आज अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस है, सुनिश्चित करें कि आप मानव जाति से जुड़े सभी उपरोक्त और अधिक मिथकों का भंडाफोड़ करें। ब्रह्मांड के सभी पुरुषों के लिए, ‘हैप्पी इंटरनेशनल मेन्स डे’!

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